उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sari duniya ganwa ke baiTha hun

सारी दुनिया गँवा के बैठा हूँ

ساری دنیا گنوا کے بیٹھا ہوں

शायर: Obaidurrahman Niyazi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सारी दुनिया गँवा के बैठा हूँ
अपनी दुनिया बना के बैठा हूँ

'उम्र भर की थकान हो गई है
एक लम्हा बिता के बैठा हूँ

टूटा पत्ता हूँ और ये सोचता हूँ
किस से दामन छुड़ा के बैठा हूँ

क्या ख़बर कोई रंग भर ही दे
चंद ख़ाके बना के बैठा हूँ

एक भटका हुआ परिंदा हूँ
डाल पर सर झुका के बैठा हूँ

कोई आएगा तो जला देगा
दिल की बत्ती बुझा के बैठा हूँ

अब कोई और खेल पेश करो
ज़िंदगी आज़मा के बैठा हूँ