उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sanwli zulfon ki chadar tan kar

साँवली ज़ुल्फ़ों की चादर तान कर

سانولی زلفوں کی چادر تان کر

शायर: Zafar Tabish4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

साँवली ज़ुल्फ़ों की चादर तान कर
मोम के जिस्मों पे इक एहसान कर

धूप की थाली में बैठा इक किसान
खा गया सूरज को रोटी जान कर

ख़ुश्क हो जाएगा दरिया एक दिन
बादलों को अपने घर मेहमान कर

मैं कई हाथों में जा कर बट गया
जोड़ दे मुझ को मिरी पहचान कर