उर्दू शायरी · ग़ज़ल

darpan se Darte ho bhai

दर्पन से डरते हो भाई

درپن سے ڈرتے ہو بھائی

शायर: Zafar Tabish5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दर्पन से डरते हो भाई
ऐसा क्यों करते हो भाई

बेटी रुख़्सत भी करते हो
आँखें भी भरते हो भाई

ऐसा क्या कर बैठे हो तुम
नींदों में डरते हो भाई

मैं तो अक्सर मर जाता हूँ
क्या तुम भी मरते हो भाई

क्यों इस घर के आँगन में तुम
दीवारें धरते हो भाई