उर्दू शायरी · ग़ज़ल

samne tez hawaon ke jo uD jaega

सामने तेज़ हवाओं के जो उड़ जाएगा

سامنے تیز ہواؤں کے جو اڑ جائے گا

शायर: Aalam Nizami5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सामने तेज़ हवाओं के जो उड़ जाएगा
वो शजर देखना इक रोज़ उखड़ जाएगा

साफ़-गोई किसे कहते हैं बताऊँगा उसे
वास्ता मुझ से जो आईने का पड़ जाएगा

क्या ख़बर थी कि तिरे शहर में आ कर कोई
दाग़-ए-रुस्वाई तिरे माथे पे जड़ जाएगा

तू बुरे लोगों की सोहबत से किनारा कर ले
वर्ना आफ़ात के दलदल में तू गड़ जाएगा

ये तो शैताँ के गुमाँ में भी न होगा 'आलम'
इस क़दर आज का इंसान बिगड़ जाएगा