उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sakit ho magar sab ko rawani nazar aae

साकित हो मगर सब को रवानी नज़र आए

ساکت ہو مگر سب کو روانی نظر آئے

शायर: Daniyal Tareer5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

साकित हो मगर सब को रवानी नज़र आए
उस रेत के सदक़े कि जो पानी नज़र आए

मैं सब्ज़ परिंदे की तरह शहर से जाऊँ
पेड़ों को मिरी नक़्ल-ए-मकानी नज़र आए

तालाब मिरे ख़्वाब के पानी से भरा हो
और उस में पड़ा चाँद कहानी नज़र आए

ये आँख ये लौ कितने ज़माँ देख चुकी है
जिस चीज़ को देखूँ वो पुरानी नज़र आए

क्या क्या न मैं मश्कीज़ा-ए-अलफ़ाज़ में भर लूँ
इक बार अगर मौज-ए-मआ'नी नज़र आए