उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sahilon par udasi rahi

साहिलों पर उदासी रही

ساحلوں پر اداسی رہی

शायर: Gautam Rajrishi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

साहिलों पर उदासी रही
इक नदी फिर से प्यासी रही

रात ने नींद पहनी मगर
ख़्वाब की बे-लिबासी रही

हुस्न वो खिलखिलाता रहा
इश्क़ पर बद-हवासी सी रही

आज फिर कुछ न कह पिए हम
आज फिर बात बासी रही

कम न हो लम्स की आँच ये
बर्फ़ बस अब ज़रा सी रही

जिस्म मंदिर हुआ सो हुआ
रूह तो देव-दासी रही

मौत पर किस लिए रोएँ हम
ज़िंदगी अच्छी-ख़ासी रही