उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hawa jab kisi ki kahani kahe hai

हवा जब किसी की कहानी कहे है

ہوا جب کسی کی کہانی کہے ہے

शायर: Gautam Rajrishi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हवा जब किसी की कहानी कहे है
नए मौसमों की ज़बानी कहे है

फ़साना है जिस्मों का बे-शक ज़मीनी
मगर रूह तो आसमानी कहे है

तुझे चल ज़रा सा मैं मीठा बना दूँ
समुंदर से दरिया का पानी कहे है

डसा रत-जगों ने है ख़्वाबों को फिर से
सुलगती हुई रात-रानी कहे है

लटें चंद चाँदी की बख़्शीं तुझे जा
विदाअ' लेती मुझ से जवानी कहे है

है चढ़ने लगी फिर से ढलती हुई उम्र
तिरी शर्ट ये ज़ाफ़रानी कहे है

नई बात हो अब नए गीत छेड़ो
गुज़रती घड़ी हर पुरानी कहे है