उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hain jitni parten yahan aasman mein shamil

हैं जितनी परतें यहाँ आसमान में शामिल

ہیں جتنی پرتیں یہاں آسمان میں شامل

शायर: Gautam Rajrishi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हैं जितनी परतें यहाँ आसमान में शामिल
सभी हुईं मिरी हद की उड़ान में शामिल

बढ़ा है शहर में रुत्बा ज़रा हमारा भी
हुए हैं जैसे हम उन के बयान में शामिल

उछाल यूँ ही नहीं बढ़ गई है लहरों की
नदी का ज़ोर भी है कुछ ढलान में शामिल

धुआँ ग़ुबार परिंदे तपिश घुटन ख़ुश्बू
हैं बोझ कितने हवा की थकान में शामिल

थीं क़िस्त जितनी भी ख़्वाबों की बे-हिसाब पड़ी
किया है नींद ने सब को लगान में शामिल

सुना है नाम से तेरे हैं बिकते अफ़्साने
मुझे भी कर ले कभी दास्तान में शामिल

ज़रा सी दोस्ती की हम से क़ाफ़ियों ने किया
किया ग़ज़ल ने हमें ख़ानदान में शामिल