उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ruswai ke KHayal se Dar to nahin gae

रुस्वाई के ख़याल से डर तो नहीं गए

رسوائی کے خیال سے ڈر تو نہیں گئے

शायर: Zafar Naseemi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रुस्वाई के ख़याल से डर तो नहीं गए
वो रास्ता बदल के गुज़र तो नहीं गए

तर्क-ए-तअल्लुक़ात से तुम को भी क्या मिला
हम भी ग़म-ए-फ़िराक़ से मर तो नहीं गए

हम पे तरस न खा हमें लाचार देख कर
हम टूट भर गए हैं बिखर तो नहीं गए

दरिया के पार उतर के जलाई हैं कश्तियाँ
नाकाम लौट के कभी घर तो नहीं गए

दौर-ए-ख़िज़ाँ में सब्ज़ा-ओ-शबनम कहाँ 'ज़फ़र'
पलकों पे आ के अश्क ठहर तो नहीं गए