उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ishq mein barbaad hone par pashemani to hai

इश्क़ में बर्बाद होने पर पशेमानी तो है

عشق میں برباد ہونے پر پشیمانی تو ہے

शायर: Zafar Naseemi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इश्क़ में बर्बाद होने पर पशेमानी तो है
फिर भी मेरी क़द्र-ओ-क़ीमत उस ने पहचानी तो है

साँस लेना भी जहाँ मुश्किल है इस माहौल में
मुझ को ज़िंदा देख कर लोगों को हैरानी तो है

ग़म-गुसारी मेरी आदत बन गई है क्या करूँ
दूसरों का ग़म उठाने में परेशानी तो है

हाथ उन से भी मिलाने के लिए तय्यार हूँ
दुश्मनों से दोस्ती की बात नादानी तो है

कौन सी ऐसी दुआ है जो न होगी अब क़ुबूल
आँख से आँसू रवाँ सज्दे में पेशानी तो है

शौक़ है पुर-पेच राहों से गुज़रने का 'ज़फ़र'
वर्ना सीधा रास्ता चलने में आसानी तो है