उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ranj rahat-asar na ho jae

रंज राहत-असर न हो जाए

رنج راحت اثر نہ ہو جائے

शायर: Zaheer Dehlvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रंज राहत-असर न हो जाए
दर्द का दिल में घर न हो जाए

मुँह छुपाना पड़े न दुश्मन से
ऐ शब-ए-ग़म सहर न हो जाए

कुफ़्र मंज़ूर है मुझे दिल से
वो मुसलमान अगर न हो जाए

हाथ उलझा रहे गरेबाँ में
चाक दामन उधर न हो जाए

है 'ज़हीर' एक मर्द-ए-संजीदा
हाँ जो आशुफ़्ता-सर न हो जाए