उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rahin-e-yas yahan dil nahin ki jaan tujhse

रहीन-ए-यास यहाँ दिल नहीं कि जाँ तुझ से

رہین یاس یہاں دل نہیں کہ جاں تجھ سے

शायर: Gauhar Hoshiyarpuri11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रहीन-ए-यास यहाँ दिल नहीं कि जाँ तुझ से
वो 'आजिज़ी है कि जाता नहीं गुमाँ तुझ से

'अजब जिहत-ब-जिहत गूँज उठा है सन्नाटा
नफ़स नफ़स है ज़माना फ़ुग़ाँ-फ़ुग़ाँ तुझ से

उमीद तुझ से किसी तौर टूटती ही नहीं
शिकस्ता-दिल न हुए दिल-शिकस्तगाँ तुझ से

किसे फ़िराक़ की लज़्ज़त हुई है अर्ज़ानी
भुला के और हुआ रब्त-ए-बे-कराँ तुझ से

इस इंहिराफ़ की तौजीह कुछ तो कर आख़िर
नियाज़-मंद तिरे और सरगिराँ तुझ से

कहें न कुछ तो सुकूत-ए-सुख़न भी रुस्वाई
चले तो बात ठहरती है दास्ताँ तुझ से

मिज़ाज-ए-'इश्क़ तलव्वुन से आश्ना ही नहीं
ख़िज़ाँ बहार बहारें रही ख़िज़ाँ तुझ से

मुसाफ़िरों को भी कुछ शर्मसार-ए-निस्बत कर
क़याम तुझ से सफ़र तुझ से कारवाँ तुझ से

क़ाफ़

सितारा-गीर सुख़न-दर-सुख़न है फ़िक्र तिरी
'उलू-ए-फ़न में 'इबारत है आसमाँ तुझ से

तिरे क़लम ने हुनर को ज़ुहूर-ए-नौ बख़्शा
निकात-ए-नुत्क़ में शाइस्ता-ए-बयाँ तुझ से

ज़मीन-ए-ग़ालिब-ए-गर्दूं-मक़ाम है 'गौहर'
ग़ज़ल-तलब हैं मह-ओ-मेहर-ओ-कहकशाँ तुझ से