उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baat baat par uski sad be-sabab kahiye

बात बात पर उस की साद बे-सबब कहिए

بات بات پر اس کی صاد بے سبب کہیے

शायर: Gauhar Hoshiyarpuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बात बात पर उस की साद बे-सबब कहिए
दिन कहे तो दिन कहिए शब कहे तो शब कहिए

मस्लहत की चाट ऐसी लग गई ज़बानों को
देखते तो हैं कब से सोचते हैं कब कहिए

ख़ामुशी सिमट कर भी दश्त है समुंदर है
और गूँजता बादल है कहीं तो अब कहिए

मुक़्तदिर भी कितना है बे-ख़बर भी कितना है
आदमी को धरती पर आदमी का रब कहिए

वक़्त का तक़ाज़ा क्या इंतिज़ार-ए-फ़र्दा क्या
दिल से पूछ कर कहिए मुँह से कुछ भी जब कहिए

बे-नशात क्यूँ गुज़रे दिल से मौज-ए-दर्द उस के
कितने ख़ूब-सूरत हैं उस के चश्म-ओ-लब कहिए

क्या अदब-गरी 'गौहर' क्या हुनर-वरी 'गौहर'
गिर्या-ए-हुनर कहिए नौहा-ए-अदब कहिए