उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rahin-e-hasrat-o-hirman-o-yas baiThe hain

रहीन-ए-हसरत-ओ-हिरमान-ओ-यास बैठे हैं

رہین حسرت و حرمان و یاس بیٹھے ہیں

शायर: Rafiq Siraji5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रहीन-ए-हसरत-ओ-हिरमान-ओ-यास बैठे हैं
वो शादमाँ हैं मगर हम उदास बैठे हैं

करें तो कैसे यक़ीं हम करें वफ़ा पे तिरी
रक़ीब अब भी तिरे आस-पास बैठे हैं

वो एक तू कि ख़ुद अपनी ख़ता पे रूठ गया
पर एक हम कि सरापा सिपास बैठे हैं

किसी का जाम रहे हैं किसी का मय-ख़ाना
हम एक उम्र से ख़ुद बन के प्यास बैठे हैं

तुम्हारे ज़िक्र पे जी भर के रोए चिल्लाए
कुछ ऐसे दिल की निकाले भड़ास बैठे हैं