उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lamhe bechaini ke tu ne bhi guzare honge

लम्हे बेचैनी के तू ने भी गुज़ारे होंगे

لمحے بے چینی کے تو نے بھی گزارے ہوں گے

शायर: Rafiq Siraji4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लम्हे बेचैनी के तू ने भी गुज़ारे होंगे
तेरी आँखों में मिरे भी तो नज़ारे होंगे

मेरी नादार मोहब्बत की शिकायत तू न कर
तेरी नख़वत ने कभी हाथ पसारे होंगे

बे-ख़ुदी जाने कहाँ मुझ को लिए फिरती है
किसी बे-नाम सी मंज़िल के इशारे होंगे

कभी ग़र्क़ाब हुआ था जो सफ़ीना मेरा
जानता था कि बहुत दूर किनारे होंगे