उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rah gaya duniya mein wo ban kar tamasha umr bhar

रह गया दुनिया में वो बन कर तमाशा उम्र भर

رہ گیا دنیا میں وہ بن کر تماشا عمر بھر

शायर: Sabihuddin Shoaiby6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रह गया दुनिया में वो बन कर तमाशा उम्र भर
जिस ने अपनी ज़िंदगी को खेल समझा उम्र भर

तुम अमीर-ए-शहर के घर को जला कर देखना
घर में हो जाएगा मुफ़्लिस के उजाला उम्र भर

ऐसा लगता है कि अब वो क़ब्र तक जाएगी साथ
दिल के ख़ानों में निहाँ थी जो तमन्ना उम्र भर

क़र्ज़ मेरी क़ौम वो कैसे चुकाएगी भला
सूद ख़ुद को बेच कर जिस का उतार उम्र भर

जानता हूँ मुझ को डस लेगा वो मार-ए-आस्तीं
जिस को अपना ख़ूँ पिला कर मैं ने पाला उम्र भर

ज़िंदगी ने'मत थी जिस को पा के तुम ख़ुश थे 'सबीह'
अब कहो क्या ज़िंदगी से तुम ने पाया उम्र भर