उर्दू शायरी · ग़ज़ल

raaz kitne daba gai miTTi

राज़ कितने दबा गई मिट्टी

راز کتنے دبا گئی مٹی

शायर: Yamit Punetha Zaif6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

राज़ कितने दबा गई मिट्टी
अच्छे-अच्छों को खा गई मिट्टी

'उम्र-भर का जगा हुआ था मैं
आख़िरश काम आ गई मिट्टी

ख़ाक में ग़र्क़ हो के कौन आया
जिस्म सब के गला गई मिट्टी

आज मरने की ज़िद मुझे क्यों है
ऐसा क्या है जो भा गई मिट्टी

ढूँढ पाएगा कौन अब मुझ को
नक़्श-ए-पा मेरे खा गई मिट्टी

मैं समाया हूँ 'ज़ैफ़' मिट्टी में
और मुझ में समा गई मिट्टी