उर्दू शायरी · ग़ज़ल

raaz-e-dil apna chhupaya der tak

राज़-ए-दिल अपना छुपाया देर तक

راز دل اپنا چھپایا دیر تک

शायर: Usha Jha6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

राज़-ए-दिल अपना छुपाया देर तक
फिर जहाँ को आज़माया देर तक

दूर दिल के हो गए शिकवे गिले
जब गले हँस कर लगाया देर तक

यार जब तक़दीर ने धोका दिया
बाँटने दुख तू न आया देर तक

राह में काँटे थे मैं चलता रहा
पा के मंज़िल मुस्कुराया देर तक

वक़्त की ख़ूबी ज़रूरत जब हुई
साथ हम-साया न पाया देर तक

हम-सफ़र मन का मिला जिस ने 'उषा'
'इश्क़ का जादू चलाया देर तक