उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHwahishen jo hazar rakhte hain

ख़्वाहिशें जो हज़ार रखते हैं

خواہشیں جو ہزار رکھتے ہیں

शायर: Usha Jha5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़्वाहिशें जो हज़ार रखते हैं
आँखें फिर अश्क-बार रखते हैं

वक़्त मुश्किल भले हो पर यारो
ज़ीस्त को साज़गार रखते हैं

मंज़िलों के लिए जहाँ में हम
हौसला बे-शुमार रखते हैं

चाँद छूने की हसरतें दिल में
यूँ जुनूँ का ग़ुबार रखते हैं

आँख में वो 'उषा' बसा ऐसे
अपना दिल बे-क़रार रखते हैं