उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phul ummid ke khila na saka

फूल उम्मीद के खिला न सका

پھول امید کے کھلا نہ سکا

शायर: Usha Jha4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फूल उम्मीद के खिला न सका
चाह कर भी बहार ला न सका

बद-नसीबी में ज़ीस्त गुज़री है
ज़ीस्त सुख से कभी सजा न सका

मुझ को कान्हा की मुरली बनना था
वक़्त राधा मुझे बना न सका

हौसले दिल में इतने सारे थे
दिन मुसीबत का भी डरा न सका