उर्दू शायरी · ग़ज़ल

be-bason par daya nahin aati

बे-बसों पर दया नहीं आती

بے بسوں پر دیا نہیں آتی

शायर: Usha Jha4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बे-बसों पर दया नहीं आती
उन को ये ही अदा नहीं आती

दोस्ती अब नहीं ज़रा ख़ुद से
मौत भी बेवफ़ा नहीं आती

सब दिखावा है इस ज़माने में
इस जहाँ को हया नहीं आती

काट कर हम दरख़्त कहते हैं
यार क्यूँकर हवा नहीं आती