उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rakh mazi ki kuredoge to kya paoge

राख माज़ी की कुरेदोगे तो क्या पाओगे

راکھ ماضی کی کریدو گے تو کیا پاؤ گے

शायर: Aalam Nizami5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

राख माज़ी की कुरेदोगे तो क्या पाओगे
कोई चिंगारी निकल आई तो जल जाओगे

एक क़तरा भी अगर हो तो बचा कर रखना
ख़ून का क़हत पड़ेगा तो कहाँ जाओगे

हो लगी मग़रिबी तहज़ीब की मेहंदी जिस में
कैसे उस हाथ से तलवार उठा पाओगे

जिस से वाबस्ता है अज्दाद की अज़्मत का भरम
उस हवेली को जो बेचोगे तो पछताओगे

अहद-ए-हाज़िर में वफ़ाओं का नतीजा क्या है
तुम जो 'आलम' से मिलोगे तो समझ जाओगे