उर्दू शायरी · ग़ज़ल

qissa un dinon ka hai jab hamein mohabbat thi

क़िस्सा उन दिनों का है जब हमें मोहब्बत थी

قصہ ان دنوں کا ہے جب ہمیں محبت تھی

शायर: Naeem Sameer7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क़िस्सा उन दिनों का है जब हमें मोहब्बत थी
ख़्वाब इक मुअ'म्मा था नींद इक अज़िय्यत थी

क्या अजीब रिश्ता था आग और पानी का
मैं बरसता बादल था और वो क़यामत थी

हम कि एक दूजे पर इस तरह से लाज़िम थे
मुझ को उस का नश्शा था उस को मेरी आदत थी

हम भटकते फिरते थे तिश्नगी के सहरा में
उन लबों पे अमृत था और मुझे इजाज़त थी

रात में मुसाफ़िर था गुल-बदन के रस्तों का
अंग अंग ख़ुशबू थी क्या हसीं मसाफ़त थी

हम गुनाह-गार-ए-शब रोकने से रुकते कब
उम्र का तक़ाज़ा था वक़्त की ज़रूरत थी

हम 'समीर' खो बैठे मस्लहत की राहों में
वो जो इक तअल्लुक़ था वो जो एक निस्बत थी