उर्दू शायरी · ग़ज़ल

qile barbaad karta aur patthar chhoD jata hai

क़िले बर्बाद करता और पत्थर छोड़ जाता है

قلعے برباد کرتا اور پتھر چھوڑ جاتا ہے

शायर: Madhuvan Rishi Raj4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

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क़िले बर्बाद करता और पत्थर छोड़ जाता है
जहाँ जाता है ख़ूँ का इक समुंदर छोड़ जाता है

मोहब्बत तेरी गुज़रे है मेरे दिल से मिरे क़ातिल
कि जैसे लूट कर शहरों को लश्कर छोड़ जाता है

तिरी यादों को मैं ले कर कहीं भी साथ जाता हूँ
कि कासा अपना कब दरवेश घर पर छोड़ जाता है

ये मेरे इश्क़ की दौलत है ऊँची क़स्र-ए-सुल्ताँ से
जो अपनी सारी दौलत को यहीं पर छोड़ जाता है