उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mera mazi hai ek hathiyar mera

मिरा माज़ी है इक हथियार मेरा

مرا ماضی ہے اک ہتھیار میرا

शायर: Madhuvan Rishi Raj5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरा माज़ी है इक हथियार मेरा
तमाचा मौत का हर वार मेरा

ज़माने को बदलने के लिए बस
है बस काफ़ी दिल-ए-बीमार मेरा

ज़रूरत तेरी होगी जिस को होगी
मुझे काफ़ी है ये अँगार मेरा

ये मेरी बातें हँसने को नहीं हैं
कि हर इक लफ़्ज़ है मुख़्तार मेरा

चला के इस को मुझ पे देख ले क्या
बिगाड़ेगी तिरी तलवार मेरा