उर्दू शायरी · ग़ज़ल

qadmon tale tu dekh ke mujhko na tanz kar

क़दमों तले तू देख के मुझ को न तंज़ कर

قدموں تلے تو دیکھ کے مجھ کو نہ طنز کر

शायर: Saba Ikram5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क़दमों तले तू देख के मुझ को न तंज़ कर
साया हूँ दिन ढला तो मैं हूँगा तवील-तर

इक चीख़ दब के रह गई नारों के शोर में
आगे जुलूस बढ़ गया इक लाश रौंद कर

डरता हूँ सुन के सुब्ह के क़दमों की आहटें
मैं एक ज़र्द रात का हूँ आख़िरी पहर

चारों तरफ़ है आग तआ'क़ुब में आप के
बेहतर यही है जाइए दरिया में अब उतर

'इकराम' एक दर्द का इस दिल में है निवास
आबाद एक संत के दम से है ये खंडर