उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pyase chehron par lagte hain Khaali hath duaon ke

प्यासे चेहरों पर लगते हैं ख़ाली हाथ दु'आओं के

پیاسے چہروں پر لگتے ہیں خالی ہاتھ دعاؤں کے

शायर: Danish Naqwi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

प्यासे चेहरों पर लगते हैं ख़ाली हाथ दु'आओं के
फिर भी कौन समझ सकता है दुख सूखे दरियाओं के

जितनी बार लिखा है मैं ने तेरा नाम दरख़्तों पर
तुझ को नाम से जानते होंगे पंछी मेरे गाँव के

अपनी मर्ज़ी करने वाले उन की बात नहीं सुनते
हम जैसों पर चल जाते हैं सारे ज़ोर ख़ुदाओं के

तेरे हाथ में ख़ुद को दे कर नादानी कर बैठा हूँ
धूप की गोद में कब पलते हैं बेटे ठंडी छाँव के

दानिश-नक़वी' देख रहे हैं हैरानी और हसरत से
उस की अपनी दो झीलें हैं हम बंदे सहराओं के