उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pyar ki baaten kab tak kije

प्यार की बातें कब तक कीजे

پیار کی باتیں کب تک کیجے

शायर: Qaleel Jhansvi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

प्यार की बातें कब तक कीजे
दिल को ज़ख़्म कहाँ तक दीजे

अंधी बहरी गूँगी बस्ती
किस से बात कहाँ तक कीजे

चोरी का कुछ चलन चला है
जीना है तो चोरी कीजे

भरम तो रखिए उल्फ़त का कुछ
मुँह से बात तो मीठी कीजे