उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHun-chakan dil kahan kahan haare

ख़ूँ-चकाँ दिल कहाँ कहाँ हारे

خونچکاں دل کہاں کہاں ہارے

शायर: Qaleel Jhansvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ूँ-चकाँ दिल कहाँ कहाँ हारे
दाँव वालों के पेच थे न्यारे

चाँदनी का ख़याल था वर्ना
थे बग़ावत पे चाँद से तारे

एक आँसू समझ के पोंछा था
ख़ून चेहरे पे मल गया सारे

ठेले ठेले पड़ा रहा सोना
लोग मिट्टी पे जुट गए सारे

थी ख़बर शाम उन के आने की
आसमाँ पर थे रात भर तारे

टूट कर कल बिखर गए फिर से
ज़िक्र पर उन के आँख भर तारे

कम मोहब्बत की आग मत समझो
कट गए कोह बह गए धारे