उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab wo jhagDe miTa chuke honge

जब वो झगड़े मिटा चुके होंगे

جب وہ جھگڑے مٹا چکے ہوں گے

शायर: Qaleel Jhansvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब वो झगड़े मिटा चुके होंगे
ख़ून कितना बहा चुके होंगे

चाँद का ज़ख़्म देखने वाले
शमएँ कितनी बुझा चुके होंगे

कल के सपनों को पालने वालो
कल तो सपने रुला चुके होंगे

उन के तुम दोस्त हो कि दुश्मन हो
वो जो मक़्तल में जा चुके होंगे

बस 'क़लील' उन की याद बाक़ी है
दुश्मनी जो निभा चुके होंगे