शायर संग्रह
Vijay pratap singh की ग़ज़लें
विजय प्रताप सिंह के नाम से उपलब्ध 4 पाठ: 4 ग़ज़ल।
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ہر طرف اک تیرگی سی ہے بتاؤ کیا کریں
har taraf ek tirgi si hai batao kya karen
ग़ज़ल · Vijay pratap singh
ہاتھ کیونکر ملا نہیں پایا
hath kyunkar mila nahin paya
ग़ज़ल · Vijay pratap singh
ہم رہیں یا نہ رہیں پر کچھ گلہ رہ جائے گا
hum rahen ya na rahen par kuchh gila rah jaega
ग़ज़ल · Vijay pratap singh
ملے تم کہاں کی جدا کر چلے
mile tum kahan ki juda kar chale
ग़ज़ल · Vijay pratap singh