उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mile tum kahan ki juda kar chale

मिले तुम कहाँ की जुदा कर चले

ملے تم کہاں کی جدا کر چلے

शायर: Vijay pratap singh7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिले तुम कहाँ की जुदा कर चले
कहानी वही फिर सुना कर चले

बड़ी देर से राह तकता रहा
अभी आ रहे हो कि आ कर चले

दिखाया वही जो न देखा कभी
सुनाया वही जो सुना कर चले

वफ़ा का अदा हक़ किया इस तरह
जफ़ा पर जफ़ा पर जफ़ा कर चले

ख़ता की न तुम से तो उम्मीद थी
ख़ता क्या हुई कि ख़ता कर चले

दुखों का न अपने तमाशा बने
सभी ज़ख़्म उन से छुपा कर चले

चला साथ तेरे तो सोचा नहीं
मुझे तुम कहाँ ले उड़ा कर चले