उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phulon se hogi dhul juda dekhte raho

फूलों से होगी धूल जुदा देखते रहो

پھولوں سے ہوگی دھول جدا دیکھتے رہو

शायर: Ejaz Asif6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फूलों से होगी धूल जुदा देखते रहो
मंज़र निखार देगी हवा देखते रहो

लाएगी रंग लग़्ज़िश-ए-पा देखते रहो
मंज़िल भी देगी अपना पता देखते रहो

हाँ बज़्म में किसी के गरेबान-ए-गोश तक
पहुँचेगा मेरा दस्त-ए-सदा देखते रहो

नींदों में खो के सीपियाँ ख़्वाबों की दोस्तो
चुनने को है ये दीदा-ए-वा देखते रहो

कब आफ़्ताब-ए-ताज़ा की पहली शुआ' से
होती है चाक शब की रिदा देखते रहो

उस कज-अदा की सम्त ब-ईं जौर-ए-मुस्तक़िल
'आसिफ़' ब-तर्ज़-ए-अहल-ए-वफ़ा देखते रहो