उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aaina shola-e-lazzat ka dikhata hai mujhe

आइना शो'ला-ए-लज़्ज़त का दिखाता है मुझे

آئنہ شعلۂ لذت کا دکھاتا ہے مجھے

शायर: Ejaz Asif5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आइना शो'ला-ए-लज़्ज़त का दिखाता है मुझे
शाम ढलते ही कोई जुर्म बुलाता है मुझे

सिर्फ़ ख़ालिद ही पे मरकूज़ नहीं मेरी निगाह
हर कोई ख़ुद से गुरेज़ाँ नज़र आता है मुझे

लहर हूँ आब-ए-रवाँ की किसी प्यासे का ख़याल
जानिब-ए-साहिल-ए-दरिया लिए जाता है मुझे

एक चेहरा जिसे देखा भी नहीं आँखों ने
रात दिन शहर की गलियों में फिराता है मुझे

जी में आता है मिटा दूँ उसे बढ़ कर 'आसिफ़'
अपने होने का जो एहसास दिलाता है मुझे