उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek muddat se tamannaon ki virani mein hun

एक मुद्दत से तमन्नाओं की वीरानी में हूँ

ایک مدت سے تمناؤں کی ویرانی میں ہوں

शायर: Ejaz Asif6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक मुद्दत से तमन्नाओं की वीरानी में हूँ
मुझ को क्या तेरी ख़बर मैं ख़ुद परेशानी में हूँ

कान रखता है तो सुन आ कर मुझे तन्हाई में
दास्तान-ए-आरज़ू हूँ आँख के पानी में हूँ

शाख़ हूँ लेकिन कोई पत्ता नहीं है जिस्म पर
ऐ हवा-ए-सुर्ख़ आ ले जा कि 'उर्यानी में हूँ

आइनों के दरमियाँ रहती थी मेरी ज़िंदगी
आज उन से दूर हो कर भी मैं हैरानी में हूँ

किस लिए बेदार रखता हूँ मैं अपने आप को
ऐ गए लम्हे बता मैं किस पशेमानी में हूँ

ज़ेहन में रहती हैं फिर क्यूँ ख़ौफ़ की परछाइयाँ
मैं अगर 'आसिफ़' किसी ग़म की निगहबानी में हूँ