उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phul rishton ke mohabbat ke chaman chhoD gae

फूल रिश्तों के मोहब्बत के चमन छोड़ गए

پھول رشتوں کے محبت کے چمن چھوڑ گئے

शायर: Iffat Zarrin5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फूल रिश्तों के मोहब्बत के चमन छोड़ गए
कितने मजबूर थे जो अपना वतन छोड़ गए

अब तबस्सुम के लिए हम को तरसना होगा
हादसे वक़्त के माथे पे शिकन छोड़ गए

आने वालों के लिए रात क़यामत होगी
कारवाँ शाम के दामन में थकन छोड़ गए

मेरे विर्से में न दौलत है न जागीर कोई
मेरे अज्दाद ज़माने में चलन छोड़ गए

मेरी हस्सास तबी'अत का असर है 'ज़र्रीं'
फूल काँटे तो न थे फिर भी चुभन छोड़ गए