उर्दू शायरी · ग़ज़ल

barish-e-ashk bazahir to suhani hogi

बारिश-ए-अश्क बज़ाहिर तो सुहानी होगी

بارش اشک بظاہر تو سہانی ہوگی

शायर: Iffat Zarrin7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बारिश-ए-अश्क बज़ाहिर तो सुहानी होगी
हाँ मगर 'उम्र समुंदर में गँवानी होगी

मश'अलें साथ रखो रात भयानक है बहुत
आग जंगल में बहर-गाम जलानी होगी

मैं मुसव्विर हूँ मिरे फ़न का तक़ाज़ा है यही
मुझ को दुश्मन की भी तस्वीर बनानी होगी

यूँ तो पत्थर की भी क़िस्मत है हसीं ताज-महल
अपनी तक़दीर मगर आप बनानी होगी

आज तो ज़ख़्म के फूलों की महक है ताज़ा
कल तुम आए भी तो हर बात पुरानी होगी

मुझ को एहसास के पैकर में न ढूँडो लोगो
मेरी आवाज़ तुम्हें ढूँढ़ के लानी होगी

हम ने हर 'अह्द से समझौता किया है 'ज़र्रीं'
कुछ भी हो अब तो हर इक बात निभानी होगी