उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghabra gae hain waqt ki tanhaiyon se hum

घबरा गए हैं वक़्त की तन्हाइयों से हम

گھبرا گئے ہیں وقت کی تنہائیوں سے ہم

शायर: Iffat Zarrin5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

घबरा गए हैं वक़्त की तन्हाइयों से हम
उक्ता चुके हैं अपनी ही परछाइयों से हम

साया मेरे वुजूद की हद से गुज़र गया
अब अजनबी हैं आप शनासाइयों से हम

ये सोच कर ही ख़ुद से मुख़ातिब रहे सदा
क्या गुफ़्तुगू करेंगे तमाशाइयों से हम

अब देंगे क्या किसी को ये झोंके बहार के
माँगेंगे दिल के ज़ख़्म भी पुरवाइयों से हम

'ज़र्रीन' क्या बहारों को मुड़ मुड़ के देखिए
मानूस थे ख़िज़ाँ की दिल-आसाइयों से हम