उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phul nahin to kanTa de

फूल नहीं तो काँटा दे

پھول نہیں تو کانٹا دے

शायर: Hafiz Karnataki5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फूल नहीं तो काँटा दे
मुझ को कोई तोहफ़ा दे

शबनम माँग रहे हैं गुल
अपनी आँखें छलका दे

पत्थर काट के कीड़े को
पालने वाला दाना दे

धूप में जलता है दिन भर
सूरज को इक चश्मा दे

'हाफ़िज़' वक़्त अगर चाहे
हातिम को भी कासा दे