उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phul agar kumhlaenge

फूल अगर कुम्हलाएँगे

پھول اگر کمھلائیں گے

शायर: M I Zaahir5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फूल अगर कुम्हलाएँगे
ग़ुंचे फिर खिल जाएँगे

कितनी अच्छी बस्ती है
हम भी घर बनवाएँगे

हाथ तुम्हारा थामा है
अब तो साथ निभाएँगे

अपना दुख मत कहना तुम
सुन कर लोग चिढ़ाएँगे

भीगी आँखों ने पूछा
कब तक धुआँ उड़ाएँगे