उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lahja wahi guftugu wahi hai

लहजा वही गुफ़्तुगू वही है

لہجہ وہی گفتگو وہی ہے

शायर: M I Zaahir5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लहजा वही गुफ़्तुगू वही है
सूरत कितनी बदल गई है

घर की सूरत बुझी बुझी है
लेकिन खिड़की खुली हुई है

तन्हाई का सफ़र न पूछो
सन्नाटे की सदा सुनी है

ख़ाली ख़ाली शजर से जंगल
अब के बारिश कहाँ गई है

'ज़ाहिर' मंज़र बदल न जाए
देखो कैसी हवा चली है