उर्दू शायरी · ग़ज़ल

basti basti shor macha hai

बस्ती बस्ती शोर मचा है

بستی بستی شور مچا ہے

शायर: M I Zaahir7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बस्ती बस्ती शोर मचा है
सहरा में इक चाँद सजा है

शाख़ पे कैसा फूल खिला है
पानी मौजें मार रहा है

दर्द उठा है टीस के दिल में
सहरा सहरा गूँज रहा है

सब अपने हैं कौन पराया
सुनने में अच्छा लगता है

नन्ही नन्ही सी आँखों में
कोई सपना तैर रहा है

हम ने सब से आँख चुरा कर
तुझ से नाता जोड़ लिया है

सब से रिश्ता तोड़ के 'ज़ाहिर'
उस ने मेरा दिल रक्खा है