उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mauj ke sath tha kinara bhi

मौज के साथ था किनारा भी

موج کے ساتھ تھا کنارا بھی

शायर: M I Zaahir4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मौज के साथ था किनारा भी
ख़ूब था आँख में नज़ारा भी

रात के साथ चाँद तारे थे
ख़्वाब में ख़ूब था सहारा भी

मुड़ के देखा तो हम को याद आया
आप सा शख़्स था हमारा भी

किस के रोने से साथ रोते हैं
चाँद भी फूल भी सितारा भी