उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phir ek bachcha hai rone wala

फिर एक बच्चा है रोने वाला

پھر ایک بچہ ہے رونے والا

शायर: Zafar Tabish5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फिर एक बच्चा है रोने वाला
फिर आ गया है खिलौने वाला

वो एक क़तरा था बारिशों का
हमारी कश्ती डुबोने वाला

मैं जिस का सदियों से मुंतज़िर था
वो एक लम्हा है खोने वाला

शफ़क़ बुझा कर चला गया है
फ़ज़ा में मोती पिरोने वाला

जतन हज़ारों किए गए थे
हुआ वही जो था होने वाला