उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phike paD gae sare chehre rang-rangile kapDon mein

फीके पड़ गए सारे चेहरे रंग-रँगीले कपड़ों में

پھیکے پڑ گئے سارے چہرے رنگ رنگیلے کپڑوں میں

शायर: Owais Jamal Shamsi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फीके पड़ गए सारे चेहरे रंग-रँगीले कपड़ों में
महफ़िल में वो शोख़ जब आया सज कर पीले कपड़ों में

चुस्त-लिबासी में भी अक्सर जिस्म सुहाने लगते हैं
लेकिन मेरे दिल को भाए वो तो ढीले कपड़ों में

यूँ तो जिस हालत में आओ मुझ को अच्छे लगते हो
काश कभी बरसात में आओ वो भी गीले कपड़ों में

काले सब्ज़ गुलाबी धानी तुम पर सब रंग जमते हैं
लेकिन और ग़ज़ब ढाती हो जानम नीले कपड़ों में

सूरज ने भी शर्म के मारे घूँघट ओढ़ा बदली का
धूप टाँकने जब वो आए छत पर सीले कपड़ों में

मेरे घर में नूर-ए-ख़ुदा की हर दम बारिश करता था
दादी का नूरानी पैकर सादा ढीले कपड़ों में