उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na KHud ko talKH-kalami ke imtihan mein rakh

न ख़ुद को तल्ख़-कलामी के इम्तिहान में रख

نہ خود کو تلخ کلامی کے امتحان میں رکھ

शायर: Owais Jamal Shamsi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न ख़ुद को तल्ख़-कलामी के इम्तिहान में रख
अभी से शहद-सिफ़त ज़ाइक़ा ज़बान में रख

न ए'तिमाद के ख़ंजर को आस्तीं से निकाल
तू मेरा दोस्त है मुझ को इसी गुमान में रख

पराए पेड़ का साया न रास आएगा
मिरे वुजूद को मेरे ही साएबान में रख

हवेलियों की ख़मोशी पे ग़ौर करना है
कुछ और जुगनू भी पलकों के आसमान में रख

तू अपनी सोच को आज़ादियाँ दे अपनी तरह
उसूल-ए-फ़िक्र-ओ-नज़र दस्त-ए-पासबान में रख

'ओवैस' अश्क-फ़िशानी भी ठीक है लेकिन
कुछ और बात मोहब्बत की दास्तान में रख