उर्दू शायरी · ग़ज़ल

haal-e-dil tahrir hone ka samay nazdik hai

हाल-ए-दिल तहरीर होने का समय नज़दीक है

حال دل تحریر ہونے کا سمے نزدیک ہے

शायर: Owais Jamal Shamsi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हाल-ए-दिल तहरीर होने का समय नज़दीक है
ख़ून में ख़ंजर डुबोने का समय नज़दीक है

दिल के चैनल पर है जारी आरज़ू का सिअरिअल
आप कहते हैं कि सोने का समय नज़दीक है

हक़-नवाई के लिए तय्यार है मेरी ज़बाँ
दोस्तों से दूर होने का समय नज़दीक है

दफ़'अतन पलकों के दरवाज़े हुए हैं बंद क्यों
ग़ालिबन मोती पिरोने का समय नज़दीक है

आँख उठी चेहरा खिला वो मुस्कुराए लब हिले
आँसुओं के दाग़ धोने का समय नज़दीक है

ना-मुकम्मल फाइलें दसियों पड़ी हैं मेज़ पर
और दफ़्तर बंद होने का समय नज़दीक है

बारिश-ए-अल्ताफ़ से दिल की ज़मीं नम है 'जमाल'
अब ग़ज़ल के बीज बोने का समय नज़दीक है