उर्दू शायरी · ग़ज़ल

payam gham ka wahi gham-gusar dete hain

पयाम ग़म का वही ग़म-गुसार देते हैं

پیام غم کا وہی غم گسار دیتے ہیں

शायर: Parveen Kaif5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पयाम ग़म का वही ग़म-गुसार देते हैं
तसल्लियाँ जो नई बार-बार देते हैं

कहाँ का होश उन्हें ये तिरी है रुस्वाई
सदाएँ तुझ को जो दीवाना-वार देते हैं

वो आते आते ये कहते हैं जल्द जाना है
वो जाते जाते नया इंतिज़ार देते हैं

बचा सकेंगे सफ़ीनों को ख़ाक तूफ़ाँ से
वो नाख़ुदा कि जो हिम्मत ही हार देते हैं

मैं जब भी ज़िक्र करूँ दिल की बे-क़रारी का
वो मुझ को सब्र का दुश्मन क़रार देते हैं