उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pankh hote kahin uDi chiDiya

पँख होते कहीं उड़ी चिड़िया

پنکھ ہوتے کہیں اڑی چڑیا

शायर: Kailash Jha Kinkar4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पँख होते कहीं उड़ी चिड़िया
फिर न पीछे कभी मुड़ी चिड़िया

क़ैद-ख़ाने में कुलबुलाती थी
अब तो आकाश से जुड़ी चिड़िया

कोई छुपता न उस की नज़रों से
ख़ूब चालाक है बड़ी चिड़िया

नाज़ उस पर किसे नहीं होगा
जब हिफ़ाज़त में है खड़ी चिड़िया