उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ajib baat hai rahbar nazar nahin aata

अजीब बात है रहबर नज़र नहीं आता

عجیب بات ہے رہبر نظر نہیں آتا

शायर: Kailash Jha Kinkar3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अजीब बात है रहबर नज़र नहीं आता
मुसीबतों में वो अक्सर नज़र नहीं आता

कभी कभी तो ये लगता है वक़्त बदला है
ग़रीब के लिए अवसर नज़र नहीं आता

तमाम हाल पे जब ग़ौर कर चुके साथी
किसी का दोश भी कमतर नज़र नहीं आता